Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 73, Verse 51
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 73, verse 51 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 73 · श्लोक 51
संस्कृत श्लोक
प्राणापानपरिस्पन्दो वेदनादनुभूयते ।
तेन यः सोऽयमाकाशे वातस्कन्ध उदाहृतः ॥ ५१ ॥
हिन्दी अर्थ
स्पंद की प्रवित् से वे स्पंद का अनुभव करते हैं; यह जो ऊपर कहा यया है उसका स्रवनिभव
अप्रिद्धि ब समर्थन करते हैं /
स्पन्द की संवित् से जो वे प्राण और अपान के स्पन्द का अनुभव करते हैं उसी उनके प्राण के
स्पन्द को उनके ब्रह्माण्डाकाश में हमने वातस्कन्ध के नाम से पहले कहा है