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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 73, Verse 49

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 73, verse 49 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 73 · श्लोक 49

संस्कृत श्लोक

तेजोणुमात्रं प्रथितं चेतित्वात्प्रथमं वपुः । क्रमेण स्फारसंवित्तिर्महानहमिति स्थितः ॥ ४९ ॥

हिन्दी अर्थ

अब पूर्वोक्‍्त को संक्षिप्त कर कहते हैं / हे श्रीरामचन्द्रजी, परम सूक्ष्म चिति पहले सबको चेतित करने से चित्त शरीर हुई और वही चित्तात्मा वर्णित क्रम से विस्पष्ट चिति होकर यानी महाज्ञानसम्पन्न होकर भँ महान्‌ ब्रह्माण्डात्मा हूँ", इस तरह जगत्‌ के शरीररूप से स्थित हो गया