Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 73, Verse 31
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 73, verse 31 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 73 · श्लोक 31
संस्कृत श्लोक
एष एव चिरं कालं तत्र भावनया तया ।
गृह्णाति निश्चयं पूर्णमाधिभौतिकमात्मनः ॥ ३१ ॥
हिन्दी अर्थ
यों समस्त जग्रत् केवल मानिक कल्यनास्वरूय होने के कारण आतिवाहिक शरीर का अवयव
ही चिद्ध होता है फ़िर भी उसमें आधिभोतिकता की प्रतीति कैसे होती है 2 उस्र पर कहते हैं /
यही चिदणु जीव दीर्घकाल की उक्त भावना से अपनें में पूर्णरूप से आधिभौतिक का
निश्चय कर लेता है