Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 73, Verse 23
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 73, verse 23 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 73 · श्लोक 23
संस्कृत श्लोक
चिदणुप्रतिभासेऽन्तः प्रथमं नामवर्जितम् ।
तन्मात्रशब्दमेतेषामेतदाकाशरूपि तत् ॥ २३ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रोत्र (कान) आदि जो पोच इन्द्रियाँ हैं; उन्हीं के विषयों मे नामरूप भेद कल्पना के पहले की
जो अवस्था हैं, वह तन्मात्रशब्द से कही जाती है, यह कहते हैं /
चितिरूप अणु का प्रतिभास होने पर भीतर सर्वप्रथम (पूर्वकी) जो इन श्रोत्र आदि पाँचों के शब्दादि
विषयों की नामरूपशन्य अवस्था है, वह तन्मात्र शब्द से कही जाती है, उसका स्वरूप अतिसूक्ष्म
है