Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 72, Verse 22
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 72, verse 22 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 72 · श्लोक 22
संस्कृत श्लोक
यथाभूतपरिज्ञानादत्र शाम्यति वासना ।
अद्वैतान्निरहंकारात्ततो मोक्षोऽवशिष्यते ॥ २२ ॥
हिन्दी अर्थ
असल में जो सत्यरूप
ब्रह्म वस्तु है, उसका ठीक ठीक परिज्ञान हो जाने पर इसी जन्म में मिथ्या वासना नष्ट हो
जाती है । फिर अद्वैतभाव की प्राप्ति और अहंकार का विलय हो जाता है, इसके बाद केवल
मोक्ष ही मोक्ष बच जाता है