Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 71, Verse 47
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 71, verse 47 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 71 · श्लोक 47
संस्कृत श्लोक
असुरैरिव पातालं कल्लोलैरलमाकुलाः ।
अथोदपतदुन्नासदिङ्नागवदनध्वनिः ॥ ४७ ॥
हिन्दी अर्थ
असुरो से पातालों के सदृश सारे समुद्र प्रलयकारी तरगों
से व्याकुल हो उठे-यों सागरो के विक्षोभ के अनन्तर उन समुद्रो में तैर रहे मृतक दिग्गजों की सूंड
के आगे के भाग से एक विलक्षण ध्वनि सुनाई पड़ने लगी