Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 71, Verse 41
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 71, verse 41 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 71 · श्लोक 41
संस्कृत श्लोक
व्यालोलवलनाक्रान्तविटपिप्रोतकच्छपाः ।
यमेन्द्रवसुधावाहैरुत्कर्णैर्भयविह्वलैः ॥ ४१ ॥
हिन्दी अर्थ
समुद्रों ने बड़ी-बड़ी गुफाओं का विदलन कर
दिया था, इससे उनमें से निकले हुए स्फटिक आदि पत्थरों के दाँतों से वे दन्तुर यानी हँसते हुए-
से प्रतीत हो रहे थे और शिखरों के ऊपर विद्यमान लम्बी-लम्बी गुफाओं के प्रान्तो में समुद्रो के तरंग
ओर जलचर प्राणी घुस गये थे ॥ ४ ०॥ चंचल वर्तुलाकार तरंगों के द्वारा आक्रान्त वृक्षों के ऊपर शाखाओं
में समुद्रों के कछुएँ एक तरह से गुँथ-से गये थे तथा इन्होंने यम, इन्द्र और पृथ्वी के वाहन महिष,
ऐरावत एवं दिग्गजों को भयविह्लल बनाकर उनके कान खड़े कर दिये था यानी उनको भी चकित कर
दिया था