Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 71, Verse 34
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 71, verse 34 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 71 · श्लोक 34
संस्कृत श्लोक
तरत्तरलमातङ्गफूत्कारा धौतभास्कराः ।
अन्योन्यवेल्लनव्यग्रप्रविदीर्णाद्रिभित्तयः ॥ ३४ ॥
हिन्दी अर्थ
ऊँचे हाथियों के
सदृश तथा अतिचपल मगरो के फूत्कार से सूर्य का मण्डल भी धुल जाने लगा ओर परस्पर कुटिल
गति की व्यग्रता से समुद्र तरगों ने बड़ी-बड़ी पर्वत भित्तियों को भी तोड़-फोड़ दिया