Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 71, Verse 32
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 71, verse 32 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 71 · श्लोक 32
संस्कृत श्लोक
दरीविदारणभ्रष्टसिंहाहतजलेचराः ।
ऊर्म्युदस्तमहारत्नभरतारकिताम्बराः ॥ ३२ ॥
हिन्दी अर्थ
सभी समुद्रो का भीतरी भाग अपना-अपना उत्तम वेग बतलाकर दूसरों पर विजय पाने
के निमित्त आगे-आगे दौड़ रहे वीर मगरो से घूर्णित (विक्षुब्ध) हो गया तथा उल्लसी मगरों के द्वारा
आक्रान्त वृक्षों से महाअरण्य-सा बना दिया गया ॥३ १॥ गुफाओं को तोड़-फोड़ देने के कारण उनमें
से सिंह निकल भागे ओर भागकर उन्होने समुद्र मे स्थित जलचरो को हताहत कर दिया तथा अपनी
तरगों द्वारा फेंके गये महारत्नसमूहों से समुद्रो ने आकाशमण्डल को तारों से युक्त बना दिया