Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 71, Verse 29
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 71, verse 29 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 71 · श्लोक 29
संस्कृत श्लोक
कल्लोलवलनावर्तविवर्तोद्वर्तिताश्रयाः ।
महाभ्रभ्रमदुत्तुङ्गतरङ्गात्तनभोदिशः ॥ २९ ॥
हिन्दी अर्थ
समुद्रो मे बड़ी-बड़ी उन्नत तरंगे उठने लग गयीं, मत्त ओर भयंकर महान आवर्त
भी होने लगे-इससे उसमें रहने वाले जलचरो मे हलचल पैदा हो गई । सारे आकाशमण्डल में एवं
दसों दिशाएँ ऊँचे-ऊँचे घूम रहे जलतरंगरूप वर्तुलाकार महामेघो से व्याप्त हो गई