Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 71, Verse 12
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 71, verse 12 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 71 · श्लोक 12
संस्कृत श्लोक
पांसुप्रमन्दनीहारधूलिधूसरसूर्यका ।
द्वन्द्विमूर्खमहादुःखिव्यसनिव्याधिताकुला ॥ १२ ॥
हिन्दी अर्थ
उस समय उस पृथ्वी में धूलि के सदृश मन्द नीहार एलं धूलि से सूर्य भी धुंधला
हो गया । शीत-उष्ण आदि द्वन्द्वो का निराकरण करने में महामूर्ख अतएव महादुःखी व्यसनी एवं व्याधियों
से पीडितजनों से वह आक्रान्त हो गई