Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 70, Verse 19
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 70, verse 19 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 70 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
प्रवर्तन्ते निवर्तन्ते नेह कार्याणि कानिचित् ।
द्रव्यकालक्रियाद्योता चितिस्तपति केवलम् ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
हे मुनिवर,
यहाँ कोई भी कार्य कभी न तो उत्पन्न होते हैं और न नष्ट ही होते हैं, केवल चिति ही दृश्य-
सी, काल-सी एवं क्रिया-सी प्रकाशित होकर तपती हे