Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 69, Verse 18
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 69, verse 18 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 69 · श्लोक 18
संस्कृत श्लोक
अन्यजगद्ब्रह्मोवाच ।
करामलकवद्दृष्टसंसारासारसार हे ।
ज्ञानामृतमहाम्भोद मुने स्वागतमस्तु ते ॥ १८ ॥
हिन्दी अर्थ
शिलोदर जगत् के ब्रह्माजी ने कहा : हे हाथ में ओंवले के सदुश
असार संसार के तत्त्व को जाननेवाले, हे ज्ञानरूपी अमृत बरसाने वाले महामेघ, हे मुने आपका
स्वागत हो