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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 69, Verse 15

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 69, verse 15 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 69 · श्लोक 15

संस्कृत श्लोक

शनैः प्रकटयामासुस्तान्यङ्गान्यस्य संविदम् । मधुपल्लवजालानि नवानीव नवं रसम् ॥ १५ ॥

हिन्दी अर्थ

बाद में धीरे-धीरे उसके वे समस्त हाथ, पैर आदि अंग-अपने-अपने ज्ञान को ऐसे प्रकट करने लगे यानी अपनी-अपनी चेतना से युक्त ऐसे होने लगे, जैसे वसन्त सम्बन्धी पल्लव नवीन रस को प्रकट करते हैं यानी नवीन रस से युक्त होने लगते हैं