Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 68, Verse 16
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 68, verse 16 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 68 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
सत्तातिवाहिको देहस्तत्परं परमार्थतः ।
प्रत्यक्षं परमं यत्तत्तदाद्यं कचनं चितः ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
ठीक हैं, ऐसा ही सही, लेकिन वह आतिवाहिक देह कोन है जिसके सद्भाव में सम्पूर्ण जगत्
का दर्शन और चित्स्वभाव का स्फुरण होता है, उको कहते हैं /
वह मायाशबल ब्रह्म ही सत् कहा जाता है । उसमें चिति की जो जगत के संस्कार से युक्त
अंश की सत्ता है, उसी को आतिवाहिक (सूक्ष्म) शरीर कहते हैं और उसका जो वह नित्य अपरोक्ष
शुद्ध चिदंश है वही उसका स्वरूप स्फुरण है