Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 67, Verse 19
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 67, verse 19 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 67 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
चिरव्यर्थोत्थया नाथ संकथाव्यथया मिथः ।
स्वास्थ्यं विस्मृतमात्मीयमवदाततमं ततम् ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
हे नाथ, हम लोगों का परस्पर जो दीर्घकाल
तक निरर्थक संभाषण हुआ, उससे उत्पन्न व्यथा से अपना अत्यन्त विशुद्ध एवं व्यापक स्वास्थ्य
(धारणा के अभ्यास से जनित अपनी मनोरूप देहरूपता) विस्मृत हो गया