Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 67, Verse 13
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 67, verse 13 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 67 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
वदत्येवं मयि वचः सोवाच वरवर्णिनी ।
विस्मयाकुलमालोक्य शिलामलिविलोचना ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीरामजी, ज्योंही मैं इस तरह से उससे प्रश्न कर रहा था त्योंही आश्चर्य से व्याकुल मुझको
देखकर शिला के सदृश निर्मल नेत्रवाली एवं सुन्दर रूपवाली उस रमणी ने कहना आरम्भ किया