Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 66, Verse 16
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 66, verse 16 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 66 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
मुनिमौनैर्धरा वार्भिर्मारुतैः कपिचापलम् ।
आकाशैरवकाशित्वं तेजोभिर्भासनं श्रितम् ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
वहाँ पर भी यहाँ के सदृश
मुनि लोगों का मुनिक्रियाओं ने, पृथ्वी का समुद्र आदि जलोंने, वायुओं ने बन्दर के सदृश
चपलता का, आकाश ने अवकाशपन का और सूर्यादि प्रकाशों ने प्रकाशन का अवलम्बन किया
है यानी सब वस्तुओं के स्वभाव यहाँ के सदृश ही हैं