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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 65, Verse 9

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 65, verse 9 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 65 · श्लोक 9

संस्कृत श्लोक

सर्व एव जगद्भावा यथेच्छं गुणलेशतः । संत्यज्यन्ते प्रमादात्तु वर्जयित्वा पतिं स्त्रिया ॥ ९ ॥

हिन्दी अर्थ

इसलिए ज़ियों के लिए सशरी वस्तुओ का त्याग छुकर (सरल) है, परन्तु एक पति का त्याग दुष्कर है, यह कहती हैं / भगवन्‌, इस जगत्‌ में जितने भी पदार्थ हैं, उन सभी को अपनी इच्छा के अनुसार गुण की अल्पता से या प्रमाद से स्त्री छोड सकती है, परन्तु पति को छोड़कर, यानी स्त्री पति को छोड़कर सभी वस्तुओं का परित्याग अनायास कर सकती है