Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 65, Verse 7
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 65, verse 7 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 65 · श्लोक 7
संस्कृत श्लोक
नाधयो व्याधयो नैव नापदो न दुरीतयः ।
कुर्वन्ति मनसो बाधां दंपत्योरनुरक्तयोः ॥ ७ ॥
हिन्दी अर्थ
महाराज, यदि
पति और पत्नी निरन्तर एक दूसरे के प्रति प्रेम करते हों, तो न मानसिक पीड़ा, न शारीरिक
पीडा, न आपदा और न दुष्ट ईतियाँ (उत्पात हेतु अतिवृष्टि, अनावृष्टि, टिड्डियाँ, मूसे, पक्षी
तथा आसन्न राजे) ही बाधा पहुँचाती हैं