Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 65, Verse 5
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 65, verse 5 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 65 · श्लोक 5
संस्कृत श्लोक
हता नीरसनाथा स्त्री हताऽसंस्कारिणी च धीः ।
हता दुर्जनभुक्ता श्रीर्हता वेश्याहृता च ह्रीः ॥ ५ ॥
हिन्दी अर्थ
जिसका पति नीरस हो, वह रत्री विनष्ट ही समञ्मनी चाहिए, जो बुद्धि संस्कारयुक्त
न हो, वह नष्ट ही समझनी चाहिए, जो श्री (लक्ष्मी) दुर्जनं से उन्मुक्त यानी दुर्जनं के पास
हो वह नष्ट ही समझनी चाहिए