Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 65, Verse 21
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 65, verse 21 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 65 · श्लोक 21
संस्कृत श्लोक
एतावतापि कालेन दंपत्योरावयोर्मुने ।
परं द्रष्टुमभूदिच्छा न काचन कदाचन ॥ २१ ॥
हिन्दी अर्थ
इससे पहले कभी भी इस ब्रह्माण्ड को मैने या मेरे पति ने नहीं देखा था, क्योकि उसे देखने की
की इच्छा ही नहीं हुई. यह कहती है /
हे मुने, इतना समय बीत जाने पर भी पहले हम दोनों पति-पत्नी को इसे देखने की कभी कुछ
इच्छा ही नहीं हुई