Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 64, Verse 65
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 64, verse 65 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 64 · श्लोक 65
संस्कृत श्लोक
व्यसनानलसंतप्ताः पतन्तो बाष्पबिन्दवः ।
छमच्छमिति मज्जन्ति कमलोत्पलपङ्क्तिषु ॥ ६५ ॥
हिन्दी अर्थ
मुनिवर, कामरूपी अग्नि से सन्तप्त, मेरे नयनाश्रु छम-छम
शब्दपूर्वक कमलोत्पलों की पंक्तियों के ऊपर गिरकर उनके भीतर प्रविष्ट हो जाते हैं और अपने
ताप से उन्हे सूखाकर स्वयं भी सूख जाते हैं