Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 64, Verse 5
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 64, verse 5 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 64 · श्लोक 5
संस्कृत श्लोक
पातालभूतलस्वर्गा इहापवरकास्त्रयः ।
कल्पनैका कुमार्यत्र कृता धातृत्वमायया ॥ ५ ॥
हिन्दी अर्थ
इस आपके जगद्रूपी घर के अन्दर पाताल, भूतल और स्वर्ग- ये तीन घर के
अन्दर के प्रकोष्ठ हैं, इन तीनों प्रकोष्ठं में हिरण्यगर्भ के आकार में स्थित माया ने चित्र-विचित्र
कल्पनारूप एक कुमारी का (गृहस्वामिनी का) क्रीडार्थं निर्माण किया है