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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 64, Verse 49

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 64, verse 49 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 64 · श्लोक 49

संस्कृत श्लोक

सहजाम्बरसंछन्ना भूतानां चित्तहारिणी । पूर्णेन्दुबिम्बवदना द्यौरिवामलतारका ॥ ४९ ॥

हिन्दी अर्थ

अनन्तर, अपने पति के द्वारा मन से निर्मित अतएव मानसी भार्या में मन्दारवृक्ष की लता के समान, उत्तम सौंदर्य से पूर्ण ऐसे वृद्धि को प्राप्त होने लगी, जैसे बसन्तमें पुष्पमंजरी ॥ ४ ८॥ मैनें साथ-साथ उत्पन्न हुए उत्तमोत्तम वस्त्र धारण किये । सभी प्राणियों के चित्त मेरी ओर आकृष्ट होने लगे । मेरा बदन पूर्णचन्द्रविम्ब के सदृश अत्यन्त ही मनोरम हो गया । मैं निर्मल तारों से युक्त आकाश के सदृश चमकदार क्रमशः बन गई