Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 64, Verse 32
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 64, verse 32 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 64 · श्लोक 32
संस्कृत श्लोक
क्वचिद्व्योमोपमसराः क्वचिद्दीर्घमरुस्थलः ।
क्वचिन्नित्यभ्रमत्पांसुः क्वचित्सर्वर्तुकाननः ॥ ३२ ॥
हिन्दी अर्थ
कहीं पर उसमें आकाश के सदृश निर्मल और विस्तृत बड़े-बड़े सरोवर हैं ।
कहीं पर महामरुस्थल हैं तो कहीं पर निरन्तर उड रही धूलि से वह पूर्ण है, कहीं पर तो उसमें ऐसे
अरण्य हैं कि उनमें बारहो मासों की ऋतु रहती हैं यानी एक साथ सभी ऋतुओं का उनमें आनन्द
मिलता है