Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 64, Verse 25
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 64, verse 25 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 64 · श्लोक 25
संस्कृत श्लोक
क्वचिदुद्वर्षदम्भोदसरिद्बाहुलुठत्तटः ।
क्वचित्सततगानीतनीतनानाभ्रसत्पटः ॥ २५ ॥
हिन्दी अर्थ
कहीं पर
बरस रहे मेघो की नदीरूप बाहुओं से उसका कुछ तटभाग तोड़ दिये जाने के कारण भयावह लगता
है, तो कहीं पर निरन्तर चलनेवाली वायु के द्वारा लाये गये अनेक मेघरूप सुन्दर वस्त्रों के कारण
भला भी लगता है