Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 64, Verse 22
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 64, verse 22 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 64 · श्लोक 22
संस्कृत श्लोक
क्वचिन्महामरुमरुन्मुक्तभांकारभीषणः ।
क्वचित्कणत्कमलिनीमत्तसारसभूषणः ॥ २२ ॥
हिन्दी अर्थ
कहीं पर मरुस्थली के बड़े-बड़े झंझावातों के द्वारा उत्पन्न
इंकारध्वनि से महान् भयंकर लगता है, तो कहीं पर वह कमलयुक्त तालाबों में कल-कल ध्वनि
कर रहे सारसो के कारण मनोरम हैं