Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 64, Verse 15
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 64, verse 15 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 64 · श्लोक 15
संस्कृत श्लोक
क्वचिच्छ्वभ्रभ्रमद्गृध्रः क्वचित्सानुमनोहरः ।
क्वचिच्छृङ्गशिखाक्रान्तवैरिञ्चनगरान्तरः ॥ १५ ॥
हिन्दी अर्थ
कहीं पर तो देवताओं के नगर के नगर हैं, कहीं पर दैत्यों के
बड़े-बड़े नगर विद्यमान हैं, कहीं पर पाताल के सदुश गहरा है यानी वहाँ प्रवेश ही होना कठिन है,
तो कहीं पर अपने शिखरो से उन्नत कन्धा किये हुए है