Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 64, Verse 13
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 64, verse 13 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 64 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
क्वचित्प्रकटसर्वार्थो मनो मतिमतामिव ।
क्वचिदत्यन्तगहनो मूर्खश्रोत्रियचित्तवत् ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
बुद्धिमान पुरुषों के मन में जैसे सभी अर्थ विस्पष्ट रहते हैं, वैसे ही
इसमें कहींपर तो सभी अर्थ विस्पष्ट हैं और कहीं पर तो यह इतना अतिगहन है, जैसे मूर्ख श्रोत्रिय
पुरुष का चित्त है