Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 63, Verse 20
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 63, verse 20 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 63 · श्लोक 20
संस्कृत श्लोक
एवं ये निहता राम किं ते कुर्वन्ति कथ्यताम् ।
अज्ञत्वान्न गता मुक्तिं चेतनान्न दृषत्स्थिताः ॥ २० ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामचन्द्रजी,
इस तरह जो स्वप्न में मारे गये कहिये वे क्या करते हैं । अज्ञान के कारण वे मुक्ति को नहीं प्राप्त
हुए तथा चेतन होने के कारण पत्थर के सदृश भी वे स्थिर न रहे