Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 62, Verse 19
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 62, verse 19 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 62 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
यथाहमाकाशवपुस्तथैवासौ खरूपिणी ।
तेन दृष्टा न सा पूर्वं देहेन ललना मया ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
यदि वह आपके समीप स्थित थी, तो फिर आपने बिना समाधि के ही पहले ही उसे क्यो नहीं
देखा, इस पर कहते हैं /
जैसा मैं आकाशमय शरीर था वैसी ही वह ललना भी आकाशमय शरीर थी, अतः समाधि के
पहले उस शरीर से मैं उसे न देख सका