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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 61, Verse 8

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 61, verse 8 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 61 · श्लोक 8

संस्कृत श्लोक

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हिन्दी अर्थ

जयत्‌ संवित्‌ का हृद्य हैं, यह तो स्वप्न में भी, जिसका सार ज्ञानभाव है, प्रस्तिद्ध हैं; यों कहते हैं / जैसे स्वप्न में जगत्‌ के रूप से संवित्‌ का (ज्ञानका)हृदय ही भासता है, वैसे ही आदि सर्ग से लेकर यह सब जो कुछ भासता है, वह ज्ञानरूप आत्मा का ही हृदय है, और असल में यह सब है- चिदाकाशरूप