Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 60, Verse 59
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 60, verse 59 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 60 · श्लोक 59
संस्कृत श्लोक
धरापीठैकपूर्णेषु तिष्ठन्त्यन्येषु देहिनः ।
भेका इव शिलाकोशे कीटा इव धरोदरे ॥ ५९ ॥
हिन्दी अर्थ
हो सकती, उक्त प्रकार होनेवाली शंका का परिहार करते हैं ।
कुछ जो केवल भूमिपृष्ठपूर्ण अन्य जगत् हैं, उनमें जीव उस तरह निवास करते हैं, जिस तरह
शिलाकोश के भीतर मेढ़क या भूमि के उदर में कीड़े