Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 60, Verse 5
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 60, verse 5 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 60 · श्लोक 5
संस्कृत श्लोक
कान्तकाञ्चनगौराङ्गीं मार्गस्थनवयौवनाम् ।
वनदेवीमिवामोदिसर्वावयवसुन्दरीम् ॥ ५ ॥
हिन्दी अर्थ
उसके अंग कमनीय सुवर्णं के सदृश
गौरवर्ण के थे, मार्गस्थ पथिक के सदुश उसका नवीन यौवन धीरे-धीरे जा रहा था, वनदेवी के
सदृश चारों ओर सुगन्ध भर देनेवाले सम्पूर्ण नखशिखान्त अवयवा के कारण वह आँखो को बड़ी ही
सुन्दर लग रही थी