Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 60, Verse 46
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 60, verse 46 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 60 · श्लोक 46
संस्कृत श्लोक
कामसंवित्तिहीनानि निःस्त्रीजातानि कानिचित् ।
भूतैः संशुष्कहृदयैर्व्याप्तान्यश्ममयैरिव ॥ ४६ ॥
हिन्दी अर्थ
अतः कोई तो प्राणी कामसंवित्ति से हीन हैं, अतः वो स्त्री के बिना
यों ही कहीं पर पैदा हो गये हैँ । कहीं पर के जगत् तो पत्थरमय शुष्क हृदयवाले प्राणियों से भरे पड़े
हैं