Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 60, Verse 38
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 60, verse 38 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 60 · श्लोक 38
संस्कृत श्लोक
इतः शुभेन नश्यन्ति यान्ति पापैस्तथा दिवम् ।
विषाशनेन जीवन्ति म्रियन्तेऽमृतभोजनैः ॥ ३८ ॥
हिन्दी अर्थ
कहीं तो प्राणी पुण्य से नष्ट हो जाते हैं और कहीं पापों से स्वर्ग जाते हैं,
कहीं पर विषभोजन से दीर्घकालतक जीते हैं, तो कहीं पर अमृतपान से मर जाते हैं । (यह मन की
अनियन्त्रित कल्पना होने के कारण कहा गया ह, वस्तुतः ऐसी बात नहीं हैं, क्योंकि इससे तो वेद
में भी अप्रायाण्य आ सकता हैं /)