Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 60, Verse 3
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 60, verse 3 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 60 · श्लोक 3
संस्कृत श्लोक
शब्ददेशपतद्वृष्टिर्दृष्टवान्वनितामहम् ।
पार्श्वे कनकनिष्पन्दप्रभया भासिताम्बराम् ॥ ३ ॥
हिन्दी अर्थ
अनन्तर मेरी योगदुष्टि पास में ही, जहाँ से शब्द हो रहा था, उस देश में पड़ गई।
मैंने वहाँ एक स्त्री देखी, उसने अपनी कनक-जैसी स्पन्दनशील प्रभा से चारों ओर के आकाशमण्डल
को प्रकाशित कर दिया था