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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 6, Verse 5

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 6, verse 5 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 6 · श्लोक 5

संस्कृत श्लोक

जायन्ते च म्रियन्ते च केवलं जीर्णजन्तवः । न धर्माय न मोक्षाय मशका इव पङ्कजे ॥ ५ ॥

हिन्दी अर्थ

॥ ज्ञान का अभाव रहने पर धर्मानुष्ठान में अधिकार न होने से देवयोनियाँ मच्छरआदि योनियों के तुल्य ही हैं यह खूचित करते हुए अपने वैशग्य के कारणभूत सर्वत्र दोषदर्शन का विस्तारपूर्वक वर्णन करते हैं / जीर्ण-शीर्ण जीव निरन्तर उत्पन्न होते और मरते रहते हैं विषयलोलुप वे जीव कमल में मच्छरों के समान न तो धर्म के लिए कोई यत्न करते है न मोक्ष के लिए ही