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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 59, Verse 62

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 59, verse 62 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 59 · श्लोक 62

संस्कृत श्लोक

परमार्थमहारण्ये चिद्गन्धर्वकृतानि वै । सूर्यदीपकदीप्तानि गृहाणि गहनात्मनि ॥ ६२ ॥

हिन्दी अर्थ

भद्र. परमार्थभूत ब्रह्मरूपी महान्‌ जंगल में मायाउपहितचितिरूप गन्धर्व के द्वारा बनाये गये तथा सूर्यरूपी दीपको से प्रकाशित वे जगत्‌-रूपी घर महान्‌ गहन हैं यानी उनका असली स्वरूप जानना बड़ा ही कठिन हैं