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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 59, Verse 43

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 59, verse 43 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 59 · श्लोक 43

संस्कृत श्लोक

कानिचित्स्वल्पकल्पानि दीर्घकल्पानि कानिचित् । अन्यान्यनियतं भूरि नियतं भूरि कानिचित् ॥ ४३ ॥

हिन्दी अर्थ

किन्हीं सर्गौ में स्वल्प ही कल्प का काल था, तो किन्हीं सर्गों में बड़ा लम्बा कल्प का काल था, दूसरे बहुतों में तो नियम ही न था यानी देश, काल, वस्तु आदि के स्वभाव का नियम ही नहीं था और दूसरे बहुतों में उनका नियम था भी