Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 59, Verse 39
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 59, verse 39 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 59 · श्लोक 39
संस्कृत श्लोक
अणुवत्सेष्यमाणानि चिदादित्यांशुमण्डले ।
परमार्थश्रियो व्योम्नि रश्मिजालानि कुण्डले ॥ ३९ ॥
हिन्दी अर्थ
तब तो ऐसे पदार्थ आपके सद्र पुरुषों के उपदेश से ज्ञात हो जायेंगे, इस पर कहते हैं।
भद्र, चैतन्यरूपी सूर्य के किरणमण्डल में परमाणुओं के सदृश अत्यन्त सूक्ष्मरूपवाले पर सर्ग
प्रसिद्धि को प्राप्त किये हुए थे (७) तथा कहीं पर तो मोक्षलक्ष्मी के कुण्डलरूप अव्याकृत आकाश
ओर भूताकाश में चित्र-विचित्र रत्नरश्मिजाल की अधिकता से चमकीले सर्ग थे, इसलिए उपदेश से
भी उनका ज्ञान होना कठिन समझिए