Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 59, Verse 16
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 59, verse 16 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 59 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
संपन्नोऽथ महाकाशं व्याप्यानन्तोऽथ सर्वगः ।
अनाकारोऽप्यनाधारः सर्वार्थाधारतां गतः ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
उम्र ध्रूताकाश में भूताकाश के कार्यभ्रूत समस्त सरष्टियो' का अवलोकन करने के लिए चिदाकाश
के साथ अभेदकल्पना कहते हैं /
तदनन्तर मैं चितिरूप महाकाश के साथ अभेदसम्बन्धी कल्पना कर असीम और सर्वगामी बन
गया । असंग-अद्बयरूप होने के कारण अनाकार और अनाधार होता हुआ भी सर्वाधारयोग्य
भूताकाश के साथ अभिन्नता से सब पदार्थों का आधारभूत बन गया