Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 58, Verse 7
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 58, verse 7 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 58 · श्लोक 7
संस्कृत श्लोक
अन्तर्गुल्माङ्कुरादीनां प्राणिवाय्वम्बुतेजसाम् ।
सन्ति सर्गसहस्राणि कथयेति प्रदर्श्यते ॥ ७ ॥
हिन्दी अर्थ
इस न्याय की सर्वत्र योजना करनी चाहिए, इस आशय से कहते हैं /
गुल्म, अंकुर आदि तथा प्राण, वायु, जल, तेज आदि के उदर में (अधिष्ठान आत्मा में) हजारों
सर्ग हो सकते हैं, इस अर्थ को बतलाने के लिए पाषाणाख्यान कहा गया है