Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 56, Verse 6
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 56, verse 6 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 56 · श्लोक 6
संस्कृत श्लोक
ध्यानैकतानतामेत्य शनैर्विश्रान्तये चिरम् ।
त्यक्ताजवं जवीभाव एकान्तार्थी शमं व्रजन् ॥ ६ ॥
हिन्दी अर्थ
तदनन्तर समाधि में एकनिष्ठा प्राप्त कर धीरे-धीरे दीर्घकाल तक विश्रान्ति
पाने के निमित्त मैने सब प्रकार की चंचलता का त्यागकर एकान्त स्थान की अभिलाषा की ओर
शान्ति की ओर जाने लगा