Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 56, Verse 29
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 56, verse 29 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 56 · श्लोक 29
संस्कृत श्लोक
क्वचिदादित्यदाहान्तं शशिशैत्यान्वितं क्वचित् ।
क्वचित्क्षुद्रजनासह्यं क्वचिदग्न्यौष्ण्यदुर्गमम् ॥ २९ ॥
हिन्दी अर्थ
कहीं पर तो सूर्य की सन्निधि के कारण दाह से प्राणी मर रहे हैं, कहीं पर तो शिशिर
ऋतु की शीतता के कारण लोग आक्रान्त है, कहीं पर भूत-प्रेत आदि के कारण बीभत्स प्रतीत हो
रहा है, कहीं पर अग्नि की उष्णता से दुर्गम है