Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 56, Verse 23
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 56, verse 23 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 56 · श्लोक 23
संस्कृत श्लोक
इति संचिन्त्य यातोऽहमाकाशमसि निर्मलम् ।
यावत्तदपि पश्यामि सकलं विततान्तरम् ॥ २३ ॥
हिन्दी अर्थ
उस
प्रकार विचारकर तलवार की धार के समान निर्मल आकाश की ओर मैं जब बढा, तब क्या देखता
हूँ कि यह भी पूर्णरूप से हजारों विक्षेप के कारणों से व्याप्त पेटवाला ही है