Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 56, Verse 16
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 56, verse 16 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 56 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
जनैर्जलचरैर्व्याप्ताः सागरा नीरकुक्षयः ।
विविधारम्भसंक्षुब्धैर्नगराणीव नागरैः ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
अनेक तरह के बड़े-बड़े समारोहों से क्षुब्ध नागरिक जनों से युक्त नगर जैसे समाधि के
प्रतिकूल हैं, वैसे ही विविध समारम्भों से पूर्ण (व्याप्त) जलचरों से जलाधार सागर भी समाधि के
प्रतिकूल हैं