Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 55, Verse 9
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 55, verse 9 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 55 · श्लोक 9
संस्कृत श्लोक
आदिसर्गे हि चित्स्वप्नो जाग्रदित्यभिशब्द्यते ।
अद्य रात्रौ चितेः स्वप्नः स्वप्न इत्यपि शब्द्यते ॥ ९ ॥
हिन्दी अर्थ
ऐसा मानने पर जाग्रत् और स्वप्न में क्या भेद रहा, इस पर कहते हैं /
सबसे पहले प्रवृत्त हुए हिरण्यगर्भ की सृष्टि मे जो चिति का स्वप्न है वह जाग्रत्-शब्द से कहा
जाता है और प्रबल रात्रि में प्रवृत्त स्वव्यष्टि-अन्तःकरणमात्र के परिणामरूप सृष्टि में जो चिति का
स्वप्न है वह स्वप्नशब्द से कहा जाता है