Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 54, Verse 12
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 54, verse 12 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 54 · श्लोक 12
संस्कृत श्लोक
यदुदेत्युदितं यच्च यच्च नोदेति नोदितम् ।
देशाद्देशान्तरप्राप्तौ विदो मध्यान्न भेदितम् ॥ १२ ॥
हिन्दी अर्थ
सारा जग्रत् निर्विषय वैतन्य से अभिन्न हैं, यह कहते हैं /
जो कार्यरूप से उदित होता है ओर कार्यरूप से उदित नहीं भी होता है । जो कारणरूप
से उदित है ओर कारणरूप से उदित नहीं भी है, वह जगत् प्रमातृ चैतन्य के एक देश से दूसरे
देश तक जाने पर जो उसका विषयशून्य मध्यमभाग है, उससे भिन्न नहीं है